Soulology and Humanology :- Detection of invisible body of human soul(मानव आत्मा के अदृश्य शरीर का पता लगाना ) => भाग -1 


आत्मा क्या हैं? लोगो को इस सवाल का जबाव देना बड़ा ही मुश्किल होता हैं। लेकिन इस भौतिक युग मे विज्ञान बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। ब्राम्हांड, पृथ्वी और मानव पर ढे़र सारी खोज हो चुकी हैं जिसके कारण कुछ जटिल  सवालों के जवाब देना आसान हो गया हैं। जितना इंसान का शारीरिक संरचना जटिल हैं उससे कही अधिक जटिल आत्मा की संरचना हैं। आत्मा एक रहस्यमयी और अविश्वासनीय संरचना हैं। आपके कल्पना से परे, इस नश्वर शरीर के अंदर एक और अविनाशी आत्मिक शरीर का बास रहता हैं। जब मानव शरीर स्पंदन करना बंद कर देती हैं, चाहे कारण जो भी हो, तब आत्मा शरीर को छोड़कर चली जाती है। एक बार जब मानव शरीर का मशीन बंद हो जाय तो फिर इसे दोबारा स्टार्ट नही किया जा सकता। क्योँकि जब एक बार शरीर मृत्यु को प्राप्त हो गया तो आत्मा उसे जिवित नही कर सकती हैं। हालाँकि आत्मा शरीर को बार-बार जीवित करने की कोशिश में लगी रहती हैं, रोती हैं, चिल्लाती हैं। जब तक शरीर नस्ट नही हो जाती तब तक आत्मा शरीर के पास ही बैठी रहती हैं। आत्मा सब से बात करने और मिलने-जुलने की कोशिश में जुटी रहती हैं लेकिन उसकी बात को कोइ सुन नही सकता और ना ही उसे कोइ देख सकता हैं इसीलिये बेवस हो कर सब कुछ देखते रहता हैं। आत्मा के रोंने और अबसाद में रहने की स्थिती कई महीनों तक निरंतर चलती रहती हैं। बृद्धा व्यक्ति की म्रित्यु के बाद ऐसी स्थीति कुछ दिन तक ही रहती हैं। आत्मा के द्वारा नश्वर शरीर को धारण करने की प्रक्रिया भी एक बहुत ही जटिल और रहस्यमयी प्रक्रिया हैं। मानव शरीर का निर्माण माता के गर्भ मे होती हैं और दुसरी तिमाही के दरम्यान विकसित हो रहे शरीर के अंदर आत्मा स्थापीत हो जाती हैं। लेकिन माता के गर्भ धारण करने के लगभग तीन महीने पहले से ही आत्मा को जन्म लेने के लिये तटस्थ रहना पड़ता हैं। इस संसार के सामान्य मानवी आत्मा के रियल संरचना को नही देख सकता । आत्मा को देखना किसी के लिए सामान्य बात हो सकती हैं पर आत्मा को जानने के लिए देखना ये गहन चिंतन और आध्यात्मिक साधना का विषय हैं या यों कहें कि आप को एक बार मर के जिने की जरुरत हैं। आत्मा के विषय में कुछ भि सोचने, समझने और देखने से पहले स्पिरिचुअल सिस्टम पर यकीन करना होगा । अगर स्पिरिचुअल सिस्टम पर स्ट्रांगली विशवास करते है, साधना करते हैं, तब आप खुद के आत्मा से रु-बरू हो सकते हैं। लेकिन इसमे एक खामी हैं। इस प्रक्रिया के तहत आप शरीरिक संरचना नही देख सकेंगे। आत्मिक शारीरिक संरचना देखने और रहस्य को जानने के लिए एक बार मर के जीना होगा, जैसा कि मैं इस दौर से गुजर चुका हूँ, तभी आप रियलिटी को समझ सकते हैं । जैसे आप सोए हों और आपके निंद्रा अवस्था मे ही शारीर पर कोई भारी संकट आ जाय। आपको जागृत अवस्था मे पुनः आने के लिए शरीर और आत्मा को बड़ी मसक्कत करनी पड़े । परंतु इस सचुएसन में ध्यान रखने वाली बात यह हैं कि आपके मन मे आत्मा के रियल स्ट्रक्चर को देखने की तमन्ना पहले से हाईली स्ट्रॉन्ग हों। इस जीवन और मौत की लडाई में आपकी जीत हो और जिंदंगी मिलते ही आप उठ के खड़े हो जाय । अगर ऐसी घटना से रु-बरू होते हैं तो आप निश्चित रूप से आत्मा के रियल स्ट्रक्चर को देख पाएंगे । यहाँ एक बात समझना होगा कि खुद के आत्मा को देखना ही आत्मिक बॉडी स्ट्रक्चर से वाक़िफ़ होना और सत्य को जान लेना हैं । दूसरे की आत्मा को देखकर आप कुछ भी जान नही सकते, ये रियलिटी हैं, इसे नाकारा नही जा सकता । इसे और डीपली समझने की कोशिश करते हैं। आत्मा को देखने के लिए ये जरूरी हैं कि स्लीपिंग स्टेज मे आपके ब्रेन का इलेक्ट्रोकेमिकल सिंगनल आपकी आत्मा को ट्रेस करे । अब सवाल बनता है कि दूसरे की आत्मा को देख कर रियल स्ट्रक्चर का पता क्यों नही लगा सकते? तो मेरा मानना हैं कि ये एक गूढ़ रहस्य हैं । आपको पता हैं, शरिर का निर्मान गर्भ मे होती हैं। तो क्या आप ये भि कह सकते हैं कि आत्मा का निर्मान भि गर्भ मे ही होती होगी, लेकिन वास्तव मे एसा नही हैं। वैज्ञानिकों ने लिविंग बॉडी स्ट्रक्चर के रहस्य को अच्छे ढंग से समझ लिया हैं। जैसे मानव शरीर में ब्रेन, हड्डी और स्किन क्या हैं ? और ये कैसे काम करता हैं ? मानव शरीर के मुख्य तीन भाग है, जैसे स्किन, हड्डी और तरल पदार्थ। मानव शरीर के अंदर पदार्थ के तीन अवस्था ठोस (हड्डी), तरल (प्लाज्मा, ब्लड, वॉटर) और गैस (ऑक्सीजन इत्यादि) विध्यमान हैं। मानव में सबसे छोटी कोशिका शुक्राणु की होती हैं और सबसे बड़ी कोशिका महिलाओं के अंडाणु की होती हैं। हमारा शरीर लाखों कोशिकाओं से मिलकर बना हैं और कोशिका हमारे जीवन की सबसे छोटी इकाई है। हमरे शरिर के इन कोशिकाओं का निर्माण गर्भ मे होती हैं। गर्भ मे माइटोकॉण्ड्रियल DNA को लेकर ओवेम शुक्राणु का इंतजार करती हैं और शुक्राणु न्यूक्लियर DNA को लेकर ओवेम के अंदर छोड़ देता हैं पर न्यूक्लियर DNA के साथ जो माइटोकॉण्ड्रिया जुड़ा रहता हैं वो ओवेम के बाहर ही टूटकर गिर जाता हैं। और फिर दोनों मिलकर एक बन जाते हैं तथा एक से फिर दो से चार, आठ, सोलह... से  लाखो  कोशिकाए बनकर एक मानव बनने की जटिल रहस्यमयी प्रक्रिया शुरु हो जाती हैं। डीएनए और आरएनए न्यूक्लिक एसिड के दो मुख्य वर्ग हैं। डीएनए सभी मुक्त जीवों में जीवन के ब्लूप्रिंट के रूप में कार्य करता है जबकि आरएनए अधिकांश विषाणुओं की आनुवंशिक सामग्री है जबकि यह मानव शरीर में कई प्रक्रियाओं जैसे प्रोटीन बनाने में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यूक्लियर DNA में मौजुद न्युक्लिक अम्ल न्युक्लियोटाइड़ से बनता हैं। न्युक्लियोटाइड़ में एक नाइट्रोजन बेस चिनी अणु, एक पाँच‌-कार्बन चिनी (ओक्सिजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन और फोसफोरस) और एक फॉस्फेट समुह (तीन सिंग्ल बॉन्ड ओक्सिजन  परमाणु और एक डबल बॉन्ड ओक्सिजन परमाणु) होता हैं। माइटोकॉण्ड्रियल DNA न्युक्लिअस के चारों ओर तरल पदार्थ, जिसे साइटोंप्लाज्म कहते हैं, में स्थित रहता हैं। इस कोशिका निर्मान के प्रक्रिया में कुल एलेवेन तत्व का योगदान होता हैं। शरीर के लगभग 99 % भाग बनने में केवल सिक्स तत्व ओक्सिजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन, केल्सियम और फोसफोरस ही भाग लेते हैं। बाँकी के  लगभग 0.85% भाग को बनने में सल्फर, पोटाशियम, सोडियम, क्लोरीन और मैग्नेशियम इन पाँच तत्वों की भागीदारी होती हैं। इन सभी तथ्यों से ये पता चलता हैं कि पदार्थ के चार अवस्थाओं मे से दो पदार्थ तरल और गैस एक जतिल प्रक्रिय से गुजरते हुए, संघनीत होकर, हमारे शरीर का निर्माण करता हैं। जो शरीर बनकर तैयार होता हैं वो ठोस, तरल, गैस युक्त शरीर होता हैं। यानी इस निर्मित शरीर को हम हार्डडिस्क युक्त बिना ऑपरेटिंग सिस्टम वाला रोबोट कह सकते हैं। अगर इसमें ऑटोमैटिक ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टोल कर दे तो यह अपना काम खुद करने लगेगा । इस प्रकार हमार शरिर जड़( पृथ्वी) तत्व हैं लेकिन हमारी आत्मा जड़ तत्व नही हैं। हमारी आत्मा ब्राम्हांड(आकाश) तत्व हैं। जिन तत्वों के सन्योजन से हमारा शरिर् बनता हैं वो सभी एग्यारह तत्व जैसे ओक्सिजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन, केल्सियम, फोसफोरस, सुल्फर, पोटाशियम, सोडियम, क्लोरीन और मैग्नेशियम पृथ्वी मे उपलब्ध हैं, और ये सभी तत्व ब्राम्हांड मे भी उपलब्ध हैं। लेकिन ब्राम्हांड इन सभी तत्वों कि उपलब्धतता इलेक्ट्रोकेमिकल, इलेक्ट्रोमैग्नेट, क्वार्क, ग्लुओन, आयन और प्लाज्मा के रुप मे अवस्थित हैं। ये सभी तत्व हमारे शरिर मे भी ठोस, तरल और गैस के रुप मे उपलब्ध हैं । हम आत्मा के शारिरिक बनावट का परिकल्पना नही कर सकते जब तक कि उसे देख ना लै। लेकिन आत्मा को देख नही सकते। और.......
                                                                                                               जारी हैं......

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